जाना बूझकर हम उस रह पर चल पड़े थे
जिस पर कांटे ही कांटे बिखरे पड़े थे,
हमें यकीन था की कभी तो बहार आएगी,
यही सोचकर हम उनके साथ हो लिए थे,
लेकिन यही धोखा था हमारे दिल का
की जिन्हें हम कांटे समझे, वो खंजर निकले,
वो चुभते रहे, जख्म बनते रहे,
हाल ये हुआ कि दर्द जिस्म से नही
दिल से उठा,
यहाँ तक कि आत्मा भी चीत्कार कर उठी
और कहने लगी, किस रह पर ले आया दीवाने
बापिस चल, अभी भी वक़्त हे तेरे पास,
हम पलट चले, ढेर सारे जख्म लिए
लेकिन इस बार दर्द कही से भी नही उठा
क्यूंकि वो पहले इस कद्र उठ चूका था
शायद वो खुद ही ख़त्म हो चूका था
बस हार मत मानो | Never Give Up
2 days ago