जब भी जाता हूँ उसके दर पर उसे गुमान होता हे
वो शख्स ऐसा है जो कभी कभी हैरान होता हे
भूल जाऊँ अगर जाना मैं उसके दर पर कभी
वो शख्स मुझसे मिलने का बेहद तलबगार होता हे
कुछ तो बात हे उसके और मेरे दरमियाँ
बरना क्यूँ ढूँढ कर मुझे वो मेहरबान होता हे
क्या तड़प हे हमारी इक-दूजे के लिए नही जानते
कभी में परेशां , to कभी वो परेशान होता हे
नहीं पड़े आजतक हम आशिकी में गौरव
दिल कहता हे कि पड़ भी जाओ तो क्या होता हे
प्रेम जो आसमान से गिरकर खजूर में नहीं अटकता
5 days ago