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Wednesday, January 20, 2010

नईदिल्ली रेलवे स्टेशन , प्लेटफोर्म नो २

नईदिल्ली रेलवे स्टेशन , प्लेटफोर्म नो २

लोकल आने मैं अभी 20-२५ मिनट बाकि,

मुझे को भूख लगी,

मैंने आलू-पूरी वाले से एक पत्ता खरीद लिया,

थोडी दूरी पर कुछ बच्चे, उम्र कोई ७-८-१० साल,

कुछ अधनंगे, कुछ फटेहाल,

टुकुर टुकुर मुझको खाते हुए देखते रहे,

मैंने खाकर जैसे ही पत्ता, कूडेदान मैं फेंका ,

वो सब उसपर टूट पड़े , लड़ने लगे,

जिसके हाथ जो लगा, वो उसको चाटने लगा,

मैंने उनको डांटा , लेकिन वो चाटने मैं मस्त,

फिर भी मैंने उनको रोका, ऐसा मत करो,

कितने दिन से भूखे हो, कोई कुछ नहीं बोला,

तभी पूरी वाला बोला , अरे साहब रहने दीजिये,

ये इनकी रोज़ की आदत है,

मैंने कहा यार, ये छोटे छोटे बच्चे हैं, भूखे हैं,

मुझ से रहा नहीं गया, वो ६-७ थे,

मैंने सभी को एक -एक पत्ता दिलवा दिया,

सभी खुश, उनकी आँखों की चमक देखकर ,

मेरा सीना गर्व से फूल गया,

और मुंझे लगने लगा, की आज मैंने

भूखे हिन्दुस्तान का पेट भर दिया,

मैं इसी से संतुष्ट हो गया,

लोकल आई , मैं उसमे बैठ गया,

लिकं मेरी आँखों के सामने ,

बही भूखे-नंगे बच्चे आ रहे थे बार-बार

और मैं सोच रहा था की ,

कल से मैं आलू-पूरी नहीं खाऊँगा

Tuesday, January 19, 2010

गाँधी जी के तीनो बंदरों का परफेक्ट मिक्सचर

कान भी बंद, आँख भी बंद,

जब कुछ दिखेगा नही ,और सुनेगा नही

तो बोलेगा क्या ख़ाक,

इसलिए मुह भी बंद,

मस्त राम मस्ती में , आग लगे बस्ती में

चीनी के भाव आसमान छू रहे हैं

नेता जी , में क्या जादूगर हूँ

ऑस्ट्रेलिया में आयेदिन इंडियन पर हमले

मीडिया को अपनी भूमिका पर ध्यान देना होगा

वो दोनों देशों के सम्बन्ध बिगाड़ने पर तुला है

हाकी इंडिया प्लेयर को तनखा नही

खिलाडिओं में देश प्रेम नही रहा,

सब के सब पेट के लिए खेलते हैं

यहाँ अपने लिए ही पैसे पुरे नही पड़ रहे

इन प्लयेर्स की डिमांड जो की

मुश्किल से कुछ लाख ही होगी

बहुत ज्यादा है, कहा है पैसा

लेकिन कैटरीना कैफ का ठुमका

और शाहरुख़ खान का १० मिनट

स्टेज अपिरिएंस

उससे कही ज्यादा कीमती है

वह री मेरी गवर्नमेंट ऑफ़ इंडिया

गाँधी जी के तीनो बंदरों का परफेक्ट मिक्सचर

ये कुछ चुनिन्दा चुने हुए बन्दर

हिन्दुस्तान की ११५ करोड़ जनता को

बन्दर बना रहे हैं

जागो मेरे देशवासिओं अब जाग जाओ

कब तक सोते रहोगे,

इन बंदरों को अब पिंजरे में बंद

करने का समय आ गया है

और क्या कहूँ,

शुरुआत तो करो

रास्ते अपने आप बनते चले जायेंगे