जैसे ही हमने कुछ लिखने के लिए कलम उठाई
उसकी याद, समय कि चादर से छन छन के आई
में चाहता हूँ कि , उसको नही लिखूंगा अब कभी
में पहले से ही इतना कुछ लिख चूका हूँ उस पर
मगर वो जेहन में इस कद्र बस चुकी है मेरे
कोई बात,उसका ख़याल आये बिना शुरू नही होती
मैं जितना भी उसको भूलना चाहता हूँ
वो पहले से ज्यादा याद आने लगती है
और मेरी कलम को मुह चिढाने लगती है
और कहती है, काश कि मुझको भूलना
इतना आसान होता तुम्हारे लिए
ये मैं भी जानती हूँ, और तुम भी जानते हो
फिर मुझसे मुह क्यूँ मोड़ते हो बार बार
अगर तुम बाकई मुझसे अलग लिखना चाहते हो
तो पहले मुझे अपना लो, अपना बना लो,
लेकिन हकीकत भी यही है,
कि वो मेरी कलम का साथ नही छोडती
अब किसने किसको जकड रखा है
मुझे नही पता,......
में असमंजस में हूँ, कि क्या करू, क्या न करू
मेरा प्यार उससे भी है, और मेरी कलम से भी
Friday, March 5, 2010
Wednesday, February 24, 2010
इट्स टाइम फॉर गिव & टेक
वाह क्या बात है, अच्छा है
मन में तो यही रहता है, मगर
इसने कभी मुझे नही दिया, तो मै क्यूँ,
चल यार दे ही देता हूँ, शायद आगे से,
कोई बात नही मै नही दूंगा
तो फर्क क्या रह जायेगा
इसमें और मुझमे,
ले भाई मेने तो दे दिया
अब देखता हूँ तुम क्या करते हो
बैसे एक बात है
इट्स टाइम फॉर गिव & टेक
भलाई का जमाना नही
शराफत भी काम नही आती
सो टिट फॉर टेट
हाँ यार कई बार ऐसा ही
करना पड़ता है
लेकिन ऐसा नही होना चाहिए
फिर भी हो जाता है
यार मै भी तो इंसान ही हूँ
मेरी सोच का दाएरा भी
कई मर्तवा सिकुड़ जाता है
बातें भले ही मै बड़ी बड़ी करूं
लेकिन उससे होता क्या है
मैं भी हुएमन बीन हूँ
यार एक बात है,
खैर छोडो न और क्या कहूँ
मन में तो यही रहता है, मगर
इसने कभी मुझे नही दिया, तो मै क्यूँ,
चल यार दे ही देता हूँ, शायद आगे से,
कोई बात नही मै नही दूंगा
तो फर्क क्या रह जायेगा
इसमें और मुझमे,
ले भाई मेने तो दे दिया
अब देखता हूँ तुम क्या करते हो
बैसे एक बात है
इट्स टाइम फॉर गिव & टेक
भलाई का जमाना नही
शराफत भी काम नही आती
सो टिट फॉर टेट
हाँ यार कई बार ऐसा ही
करना पड़ता है
लेकिन ऐसा नही होना चाहिए
फिर भी हो जाता है
यार मै भी तो इंसान ही हूँ
मेरी सोच का दाएरा भी
कई मर्तवा सिकुड़ जाता है
बातें भले ही मै बड़ी बड़ी करूं
लेकिन उससे होता क्या है
मैं भी हुएमन बीन हूँ
यार एक बात है,
खैर छोडो न और क्या कहूँ
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