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Wednesday, June 23, 2010

कौन कहता है कि तुमने ...........

कौन कहता हे कि

तुमने मुझको कम जाना हे

में कहता हूँ कि एक तुम ही हो

जिसने मुझको जाना है,

तेरे हर गीत और ग़ज़ल में

मेरा ही तो फ़साना है

कौन कहता है कि तुमने

मुझको कम जाना है.,...

जब जला ही चुके हो

चरागे मुहब्बत दिल में

फिर कौन सा गीत बाकि हे

ओ मेरी जाने-ए-ग़ज़ल

जिसको तेरे होठो पर आना है

कौन कहता है कि तुमने मुझे

कम जाना है...

एक तुम ही तो हो,

जिसने मुझे जाना है....

Tuesday, June 22, 2010

कुछ यूँ ही

जहा देखो, जब देखो

इसे देखो, उसे देखो,



किस किस को देखो

अपने सिवा सबको देखो,



कभी अपने को भी देखो!



ढूंढ़ लेगा जिस दिन तू खुद को खुदही में

मिल जायेगा तुझको खुदा खुदही में,



फिर न होगी कोई गलफ़त इस जहाँ में

जिस दिन बन जायेगा इंसान तू खुदही में,



नसीहते सबको और खुद को फजीहते

अब बस भी कर खुद जरा झांक खुदही में