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Wednesday, September 23, 2009

दूकान

उनकी दूकान मेरी दुकान से पुराणी है,

नामी -गिरामी है,

वो बेभाव की चीज भी

अच्छे खासे भावः पर बेचते हैं ,

हमने अभी अभी, अपना काउंटर खोला है,

कुछ स्टैण्डर्ड, कुछ लोकल डाला है,

फिर भी कहते हैं की मजा नही आयेला है,

हमने कहा की मजा किसी के बाप का नही,

जो फ्री मैं आएगा,

मजा तो उसी मैं है

जो मिल बाँट कर खायेगा.

Friday, September 18, 2009

ओल्ड एज हसीना

ओल्ड एज हसीना

एक दिन अचानक हमारी मुलाकात
ओल्ड एज हसीना से हो गयी,
हमने कहा वाह भाई वाह,
आप तो कमाल लगती हैं,
आपके सामने तो कमसिन हसिनाये
भी पानी भरती हैं ,
आखिर क्या राज है
आपकी इस खूबसूरती का,
उन्होंने मुस्कराकर कहा,
राज की कोई बात नही मेरे भाई,
ए तुम्हारी नजरों का फेर है
बस यूँ समझो की
अंधे के हाथ लगी बटेर है,
वो बातों ही बातों मैं हमें,
भाई और अँधा बना गयी,

अपनी खूबसूरती मैं,

और भी चार चाँद लगा गयी,