http://www.clocklink.com/world_clock.php

Saturday, June 26, 2010

मैंने तुम्हे कुछ इस तरहा से जाना है...........

मैंने तुम्हे कुछ इस तरहा से जाना है की तुम एक गुलाब के फूल की तरहा हो


जिसकी कुछ पंखुडिया खुली हुई , कुछ अध् खुली और कुछ एक दम से बंद,

हाँ तुम कुछ इस तरहा से ही हो, मेरे मन के अंतर्द्वंद मैं ,

लेकिन मैं उस शाख को नही पकड़ना चाहता जिस पर तुम ,

अपनी चिरपरिचित मुस्कान लिए लहरा रही हो,

मैं तुमको उस टहनी से अलग नही करना चाहता,

तुम्हारा सौन्दर्य उसी के साथ है, और तुम मुझे वही से ही अच्छी लगती हो,

हाँ मैं इंतजार करूँगा , की तुम एक दिन उस शाख से झरो, और बिखर जाओ,

यही कही, फिर मैं तुमको सहेजूगा प्यार से, अपने से लगाऊंगा ,

ताकि तुमको एहसास हो की, तुम्हारे इस पतन के बाद भी,

तुम्हारा एक नया जीवन शुरू हुआ है, कोई है जो तुमको

अपने गले लगाना चाहता है, तुम्हारा अपना.....

Wednesday, June 23, 2010

कौन कहता है कि तुमने ...........

कौन कहता हे कि

तुमने मुझको कम जाना हे

में कहता हूँ कि एक तुम ही हो

जिसने मुझको जाना है,

तेरे हर गीत और ग़ज़ल में

मेरा ही तो फ़साना है

कौन कहता है कि तुमने

मुझको कम जाना है.,...

जब जला ही चुके हो

चरागे मुहब्बत दिल में

फिर कौन सा गीत बाकि हे

ओ मेरी जाने-ए-ग़ज़ल

जिसको तेरे होठो पर आना है

कौन कहता है कि तुमने मुझे

कम जाना है...

एक तुम ही तो हो,

जिसने मुझे जाना है....