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Monday, October 11, 2010

किसी के बाप का, क्या जायेगा.........


फैसला जो आना, आ ही जायेगा
किसी के बाप का, क्या जायेगा

मस्जिद बने या वो मंदिर रहे
क्या तू वहां मत्था टेकने जायेगा

बहुतों को तो पता ही नही कि मसला क्या हे
फिर भी वो इस सैलाव ने बह ही जायेगा

क्या जरुरी हे कि झगडे -फसाद हों
पर तू पहले से ही शोर मचाएगा

क्यूँ खेलते हो तुम नादानों कि जिन्दगी से
बिना इसके क्या तू रह नही पायेगा

खून राम का बहे या रहीम का बहे
बहा खून किसका है, क्या तू बता पायेगा

ये सब फालतू कि बाते जो करते हैं लोग
किसी के घर का चिराग, तो किसी का
चुहला बुझ ही जायेगा

फैसला जो आना, आ ही जायेगा
किसी के बाप का, क्या जायेगा.........

Monday, October 4, 2010

वो क्या हे पुराना जो याद आता हे...................


अब यह मत पूछना कि वो क्या हे पुराना जो याद आता हे
क्यूँ अक्सर हमें आपकी वो बातें, वो तराना याद आता हे
कितनी हसरतों से बनाये थे हमने कुछ हमराज अपने
हमें अब गुजरा हुआ वो जमाना, अक्सर याद आता हे
भुला भी दें तो क्यूँकर भुला दे वो यादें
जिसमे शामिल थे हमारे कुछ वादे
तुम्हे भूलना गर इतना आसान होता
क्यूँ कर तुम्हारा मुस्कराना भरी महफ़िल में
अक्सर याद आता हे!
ए-वक़्त ले चल तू जरा उसी दौरे-जमाँ में
हमें उनका बात-बात पर मचलना अक्सर याद आता हे
हमें याद आती हैं उनकी वो शोख-चंचल निगाहें
उनका यूँ देखकर न देखने की वो कातिल अदाएँ
हमें वो सावन का महिना याद आता हे
उनका यूँ बारिश में भीगना अक्सर याद आता हे
अब यह मत पूछना कि वो क्या हे पुराना जो याद आता हे
क्यूँ अक्सर हमें आपकी वो बातें, वो तराना याद आता हे.......

EK-kHAYAAL APNA SA........