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Wednesday, February 17, 2010

बता दे हमको भैया

एक तरफ मित्र है, तो एक तरफ है प्यार

दो पाटन के बीच में, मैं खड़ा हुआ लाचार



खड़ा हुआ लाचार , की कित को कदम बढाऊँ

एक और कदम बढाऊँ, तो दूजा दूर है पाऊँ



दूजा दूर है पाऊँ , समस्या बहुत ही गंभीर

खुद को पाए "गौरव" , बड़ा ही धीर - अधीर



कहे "गौरव" भाई , ये है बड़ी बिचित्र समस्या

है गर कोई समाधान , तो बता दे हमको भैया

7 comments:

संजय भास्कर said...

बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
ढेर सारी शुभकामनायें.

संजय कुमार
हरियाणा
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

रश्मि प्रभा... said...

sabut rahna hai n? dhyaan se kadam badhayen

sangeeta swarup said...

दो नावों की सवारी
पड़ जाती है भारी

असमंजस की स्थिति का खूब अच्छा वर्णन है..

GAURAV VASHISHT said...

Shukriya bhaskar ji

GAURAV VASHISHT said...

Koi chinta nhi Rashmi DI,
aap he na sambhalne ke liye
hahahahahaha

GAURAV VASHISHT said...

shukriya Sangeeta di

संजय भास्कर said...

बहुत ही सुन्‍दर प्रस्‍तुति ।