http://www.clocklink.com/world_clock.php

Monday, October 11, 2010

किसी के बाप का, क्या जायेगा.........


फैसला जो आना, आ ही जायेगा
किसी के बाप का, क्या जायेगा

मस्जिद बने या वो मंदिर रहे
क्या तू वहां मत्था टेकने जायेगा

बहुतों को तो पता ही नही कि मसला क्या हे
फिर भी वो इस सैलाव ने बह ही जायेगा

क्या जरुरी हे कि झगडे -फसाद हों
पर तू पहले से ही शोर मचाएगा

क्यूँ खेलते हो तुम नादानों कि जिन्दगी से
बिना इसके क्या तू रह नही पायेगा

खून राम का बहे या रहीम का बहे
बहा खून किसका है, क्या तू बता पायेगा

ये सब फालतू कि बाते जो करते हैं लोग
किसी के घर का चिराग, तो किसी का
चुहला बुझ ही जायेगा

फैसला जो आना, आ ही जायेगा
किसी के बाप का, क्या जायेगा.........

10 comments:

उपेन्द्र " the invincible warrior " said...

बिल्कुल सही कहा...

संजय भास्कर said...

ला-जवाब" जबर्दस्त!!
आपसे बिलकुल सहमत हूँ
शब्दों को चुन-चुन कर तराशा है आपने ...प्रशंसनीय रचना।

shikha varshney said...

To the Point ...Noce one.

प्रवीण पाण्डेय said...

अब तो लोगों को समझना होगा।

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत सटीक लेखन ..

दिगम्बर नासवा said...

आपका कहना बहुत हद तक ठीक है .... पर क्या सब इस बात से सहमत हैं .... पहल कौन करे ... आक्रांता या बड़ा ....

Umra Quaidi said...

लेखन के लिये “उम्र कैदी” की ओर से शुभकामनाएँ।

जीवन तो इंसान ही नहीं, बल्कि सभी जीव जीते हैं, लेकिन इस समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार, मनमानी और भेदभावपूर्ण व्यवस्था के चलते कुछ लोगों के लिये मानव जीवन ही अभिशाप बन जाता है। अपना घर जेल से भी बुरी जगह बन जाता है। जिसके चलते अनेक लोग मजबूर होकर अपराधी भी बन जाते है। मैंने ऐसे लोगों को अपराधी बनते देखा है। मैंने अपराधी नहीं बनने का मार्ग चुना। मेरा निर्णय कितना सही या गलत था, ये तो पाठकों को तय करना है, लेकिन जो कुछ मैं पिछले तीन दशक से आज तक झेलता रहा हूँ, सह रहा हूँ और सहते रहने को विवश हूँ। उसके लिए कौन जिम्मेदार है? यह आप अर्थात समाज को तय करना है!

मैं यह जरूर जनता हूँ कि जब तक मुझ जैसे परिस्थितियों में फंसे समस्याग्रस्त लोगों को समाज के लोग अपने हाल पर छोडकर आगे बढते जायेंगे, समाज के हालात लगातार बिगडते ही जायेंगे। बल्कि हालात बिगडते जाने का यह भी एक बडा कारण है।

भगवान ना करे, लेकिन कल को आप या आपका कोई भी इस प्रकार के षडयन्त्र का कभी भी शिकार हो सकता है!

अत: यदि आपके पास केवल कुछ मिनट का समय हो तो कृपया मुझ "उम्र-कैदी" का निम्न ब्लॉग पढने का कष्ट करें हो सकता है कि आपके अनुभवों/विचारों से मुझे कोई दिशा मिल जाये या मेरा जीवन संघर्ष आपके या अन्य किसी के काम आ जाये! लेकिन मुझे दया या रहम या दिखावटी सहानुभूति की जरूरत नहीं है।

थोड़े से ज्ञान के आधार पर, यह ब्लॉग मैं खुद लिख रहा हूँ, इसे और अच्छा बनाने के लिए तथा अधिकतम पाठकों तक पहुँचाने के लिए तकनीकी जानकारी प्रदान करने वालों का आभारी रहूँगा।

http://umraquaidi.blogspot.com/

उक्त ब्लॉग पर आपकी एक सार्थक व मार्गदर्शक टिप्पणी की उम्मीद के साथ-आपका शुभचिन्तक
“उम्र कैदी”

रजनी मल्होत्रा नैय्यर said...

आपसे बिलकुल सहमत हूँ.........

ALOK KHARE said...

aap sabhi ka dil se abhaar , bas yun hi pyar dikhate rahiye

ALOK KHARE said...

aap sabhi ka dil se abhaar , bas yun hi pyar dikhate rahiye