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Saturday, February 26, 2011

हर किसी को मयस्सर नही..........



वो रहे हैं जो लोग कांटे , तुम्हारे रास्तों पर
उनको भी इक दिन, इस राह से गुजरना होगा,

वक़्त थम सा गया हे कुछ पल के लिए ही सही
यूँ हर अन्धकार के बाद तो उजाला ही होगा,

ये दस्तूरे दुनिया है, जिसे तुम बदल नही सकते
हर शख्श को इन हालातों से लड़ना ही होगा,

कौन कहता हे कि मंजिले आसानी से मिलती हैं
मिलने वालों से पूछो,फासला तो मुश्किल होगा,

हर किसी को मयस्सर नही ये आसान जिदंगी
हसीन बनाने के लिए कुछ तो कर गुजरना होगा,

फकत अपनी ख़ुशी के लिए, बुझाते हैं चिराग औरों का
क्या उनके अँधेरे से इनके घर में उजाला होगा,

जिदगी खुद भी तो एक इम्तिहान है ए मेरे दोस्त
पास हो जाये तो समझो, कितना खुशकिस्मत होगा,

क्यूँ नही समझती ये जालिम दुनिया
कि आज वक़्त तेरा, तो कल उसकी नज़र होगा,

जो वक़्त रहते संभल जाये तो क्या कहना
हर कोई हर किसी का हम निवाला होगा,

ये तो मन का बहम है जो ये सोचते हैं "गौरव"
उजाड़कर आशियाना किसी का, कोई चैन से सोया होगा

18 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

आपकी कुछ कर गुजरने की सोच में हम शरीक हैं।

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " said...

फकत अपनी ख़ुशी के लिए ,बुझाते हैं चिराग औरों का

क्या unke अँधेरे से इनके घर में उजाला होगा

बढ़िया शेर

उस्ताद जी said...

हर किसी को मयस्सर नही ये आसान जिदंगी
हसीन बनाने के लिए कुछ तो कर गुजरना होगा,

कई शेर अच्छे लगे

Roshi said...

bahut sunder likha hai

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

अच्छी गज़ल ...कुछ कर गुज़रने का आह्वान करती हुई

shikha varshney said...

achhee soch ke saath achhee lagi gazal

क्रिएटिव मंच-Creative Manch said...

फकत अपनी ख़ुशी के लिए, बुझाते हैं चिराग औरों का
क्या उनके अँधेरे से इनके घर में उजाला होगा,

waah! bahut khuub!

bahut hi achchha likha hai .

संजय भास्कर said...

आप ने बहुत कमाल की गज़ले कही हैं

संजय भास्कर said...

कुछ दिनों से बाहर होने के कारण ब्लॉग पर नहीं आ सका
माफ़ी चाहता हूँ

kshama said...

Behad khoobsoorat ashaar hain!

anju choudhary..(anu) said...

फकत अपनी ख़ुशी के लिए, बुझाते हैं चिराग औरों का
क्या उनके अँधेरे से इनके घर में उजाला होगा,
waha bahut khub........ak ji aap is tarah se bhi likhte hai....bahut khub...

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी प्रस्तुति मंगलवार 01-03 - 2011
को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..

http://charchamanch.uchcharan.com/

Udan Tashtari said...

बढ़िया भाव हैं रचना के....

ehsas said...

बेहतरीन गजल। आभार।

मोहिन्दर कुमार said...

भावों का गुलदस्ता समेटे है ये गजल आप की
दुनिया बदल सकती है प्यार की पहल आप की

Dr (Miss) Sharad Singh said...

वो रहे हैं जो लोग कांटे , तुम्हारे रास्तों पर
उनको भी इक दिन, इस राह से गुजरना होगा,
वक़्त थम सा गया हे कुछ पल के लिए ही सही
यूँ हर अन्धकार के बाद तो उजाला ही होगा,.....

सार्थक संदेश देती अच्छी ग़ज़ल।

अजय कुमार said...

अच्छी गजल ,बधाई

Khare A said...

aap sabhi guni jano ka dils e abhaar, rachna ke sneh ke liye