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Wednesday, June 1, 2011

मैं इजहारे इश्क करता तो... (एक ख्याल अपना सा)


Blog parivaar

आज मेरे इरादों में बदनीयती आ जाने दो,
मुझको तुम्हारे ख्यालों में खो जाने दो,
मुद्दतों के बाद ये मौसम दीवाना हुआ है
आज तो इन बादलों को बरस जाने दो!

गुजारा है वक़्त हमने भी कुछ इस तरहा
इन्तजार में तेरे  ओ मेरी जाने जां
एक अरसे के बाद कुछ सुर मिले हैं
आज तो इस सरगम को गुनगुनाने दो!

मेरी चाहत को तुम यूँ दरकिनार न करो
मुझे छोड़कर किसी और से प्यार न करो
मुद्दतों के बाद ये मुहब्बत कि कलि खिली है
इसे फूल बनने से पहले मुरझाने न दो!

मैं इजहारे इश्क करता तो कैसे करता,
कभी जमाना तो कभी उम्र दगा दे गयी!

5 comments:

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

इज़हार करने की भी कोई उम्र होती है ? :):)

सुन्दर भावाभिव्यक्ति

shikha varshney said...

आज मेरे इरादों में बदनीयती आ जाने दो,
मुझको तुम्हारे ख्यालों में खो जाने दो,
मुद्दतों के बाद ये मौसम दीवाना हुआ है
आज तो इन बादलों को बरस जाने दो!
वाह क्या बात है...बहुत खूब.

प्रवीण पाण्डेय said...

उम्र और जमाना, दोनों ही मन के गुलाम हैं, बाहर निकल कर जियें।

ali said...

आज मेरे इरादों...बादलों को बरस जाने दो!

गुजारा है वक़्त ... सरगम को गुनगुनाने दो!

मेरी चाहत को ...पहले मुरझाने न दो!



इज़हार तो कर ही डाला ना :)

mangla"bhavnaye" said...

or bhi gam hai jamne me mohobbat ke siva ,rahen bhi do ab tum izhare wafa ,kyu ki tum ko bhi hai pata or un ko bhi hai pata,kya hai izhare wfaa....